July 6, 2022

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जानलेवा है नींद में सांस रुकना, दुनिया में 100 करोड़ से ज्यादा लोग हैं ग्रसित

मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी के निधन के बाद आब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) यानी नींद के दौरान सांस रुकने की बीमारी चर्चा में है। समय पर इस रोग की पहचान नहीं होने के कारण उपचार में देरी से इसके रोगियों की नींद में ही हृदयाघात से मौत हो जाती है। इसमें सांस नली के चिपकने से आक्सीजन की कमी व सांस फूलने से हुए कंपन के कारण हृदय की गति बिगड़ती है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, शरीर में 50 फीसद से कम आक्सीजन होने पर हृदयाघात से मौत होने की आशंका बढ़ जाती है। दुनिया में करीब 100 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। देश की करीब 10 फीसद, खासकर शहरी आबादी को स्लीप एपनिया की समस्या है। इसके कारण रात में ठीक से नींद नहीं आने और दिन में झपकी से सड़क हादसे की आशंका भी काफी बढ़ जाती है। अभी तक इस रोग के उपचार की कोई दवा नहीं है। आटो सी-पैप मशीन लगाकर सोने से इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

खर्राटे लेने वालों को ज्यादा खतरा: अधिक वजन और खर्राटा लेने वालों को आब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित होने की आशंका ज्यादा होती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि खर्राटा लेने वाले हर व्यक्ति को यह समस्या होगी। खर्राटे लेने वालों को इसका खतरा इसलिए ज्यादा होता है, क्योंकि इससे होने वाला कंपन हृदय की कार्य प्रणाली पर दुष्प्रभाव डालकर हृदय रोगी बना सकता है। इस कंपन के कारण हृदय ऐसे हार्मोन का स्राव करता है, जिससे व्यक्ति को रात में कई बार यूरिन पास करने जाना पड़ता है। वहीं हृदय की चाल अनियमित होने से लकवा का खतरा भी बढ़ जाता है।

लक्षणों की जानकारी है जरूरी: यह रोग बढ़े वजन के लोगों में अधिक होता है। खासकर उन पुरुषों में जिनका गला बहुत छोटा और थुलथुला होता है। यदि सुबह उठने पर सिर में भारीपन या दर्द हो, कार्यालय या वाहन चलाते समय झपकी आए, घरवाले खर्राटे की शिकायत करें या व्यक्ति एक तेज खर्राटे के साथ नींद से उठ जाए तो स्लीप एपनिया की जांच कराना अतिआवश्यक है। वहीं यदि किसी व्यक्ति का वजन अनियंत्रित है और बीपी व शुगर भी धीरे-धीरे अनियंत्रित होने लगे तब भी चिकित्सकीय परामर्श जरूरी हो जाता है।