July 5, 2022

Guidance24

Latest News and Blog Updates

सांप के जहर का शरीर पर ऐसा क्या असर पड़ता है जिससे मौत हो जाती है ?

ऐसे फैलता है सांप का जहर सांप के काटने का असर अलग अलग है कोई सांप बहुत ज्यादा विषैला होता है और कोई बहुत कम जो विषैले सांप होते हैं उनके काटने के तुरंत बाद कभी कभी आदमी की मृत्यु हो जाती है | विषैले साँपों के काटने पर हर साल करीब १ लाख से ज्यादा जाने जाती हैं |

कैसे फैलता चला जाता है सांप का जहर

सांप का विष खून से कम लेकिन लसिका मार्ग से ज्यादा चढता है। सांप का ज़हर असल में प्रोटीन होता है। यह सांप के ऊपरी जबड़े में स्थित एक थैली में मौजूद रहता है। ऊपरी जबड़े के दोनों ओर स्थित एक एक थैली ज़हरीले दांतों की जड़ों में खुलती है। वाइपर के ज़हरीले दांत अंदर से नलीनुमा होते हैं (इन्जैक्शन की सूई की तरह) इसलिए ज़हर ठीक शरीर के अंदर चला जाता है। कोबरा और मण्यार के दांतों में एक खाली नली होती है जिससे होकर ज़हर काटे जाने वाली जगह में चला जाता है। सांप अपने दुश्मन को मारने के लिए ज़हर का इस्तेमाल करते हैं। मेढक या चूहे को मारने के लिए यह ज़हर काफी ज़्यादा होता है। परन्तु दूसरी ओर इंसानों या मवेशियों को मारने के लिए एक डंख के ज़हर की मात्रा लगभग पर्याप्त होती है। करैत का ज़हर किसी भी और सांप के ज़हर से ज़्यादा खतरनाक और विषैला होता है। छोटा वायपर के एक बार काटने से औसतन जितना ज़हर निकलता है उसकी मात्रा किसी मनुष्य को मारने के लिए जितना ज़हर चाहिए होता है उससे आधी होती है। सांप के निचले भाग की खाल से भी सांप को पहचानने में मदद मिलती है। ज़हरीले सांपों में शल्क एक तरफ से दूसरी तरफ बिना टूटे हुए फैले होते हैं। बिना ज़हर वाले सांपों में ये शल्क बीचमें विभाजित होते हैं।

सांप के ज़हर का असर

सांप के ज़हर में चार तरह के विषैले पदार्थ होते हैं –

  • तंत्रिका-विष मस्तिष्क पर असर करते हैं।
  • खून के जमने पर असर करते हैं।
  • हृदय पर असर करते हैं।
  • आस पास के ऊतकों को खतम कर देते हैं। मस्तिष्क विषों से दिल और श्वसन तंत्र के दिमागी केन्द्रों पर असर करते है। इससे जल्दही मृत्यु हो जाती है। इसी तरह से हृदय के रुक जाने से तुरंत मृत्यु हो जाती है। सांप के काटने से अचानक होने वाली मौतें दिल के जीवविषों के कारण होती हैं। परन्तु कुछ मौतें हद से ज़्यादा डर जाने के कारण होती हैं।

मस्तिष्क विष

करैत का जहर तंत्रिका तंत्र को बाधा करता है। डोमी या कोबरा का जहर तंत्रिका तंत्र को बाधा करता है। करैत और कोबरा में मस्तिष्क विष होते हैं। सांप के काटने पर ये ज़हर लसिका और खून में पहुँच जाते हैं। इनके द्वारा ये मस्तिष्क के केन्द्रों तक पहुँच जाते हैं। जीवन को सम्भालने वाले हृदय और श्वसन तंत्र काम करना बंद कर देते हैं। सौभाग्य से निओस्टिगमाइन नाम की दवा मस्तिष्क के लकवा करने के असर से बचाव कर देती है। इसका इंजेक्शन होता है।

खून के जीवविष

वाइपर वाला विष चंद मिनटो में खून के जमने की प्रक्रिया प्रभावित करता है। इससे मसूड़ों, गुर्दों, नाम, फेफड़ों, पेट, मस्तिष्क, दिल आदि में से खून निकलने लगता है। एक बार शुरु होने के बाद यह रक्त स्त्राव एक दो घंटों में जानलेवा हो सकता है।

सांप के काटने के लक्षण

ज़हरीले सांपों के काटने पर दांतों के दो निशान अलग ही दिखाई देते हैं। गैर विषैले सॉंप के काटने पर दो से ज्यादा निशान होते है। मगर यह निशान न दिखने से सॉंप नहीं काटा है, ऐसा सोचना गलत है। सॉंप विषके अन्य असर ज़हर के प्रकार और सांप के काटने के बाद बीते समय पर निर्भर करते हैं।

तंत्रिका तंत्र के असर

न्यूरो जीवविष से पलकें भारी होने लगती हैं – करीब ९५ प्रतिशत मामलों में यह सांप के काटने का पहला लक्षण होता है। इस लिए नींद आना सबसे पहला लक्षण होता है। इसके बाद निगलने और सांस लेने में मुश्किल होनी शुरु हो जाती है। सांस की दर नापने का तरीका एक उपयोगी तरीका है। (आहत व्यक्ति से कहना कि वो एक बार के सांस लेकर उंगलियों पर गिने) अगर हर अगली सांस के साथ गिनती कम और कम होती जाए तो इसका अर्थ है कि सांस लेने की क्षमता पर असर हो रहा है। अगर डंक जहरीला हो तब असर ज़्यादा से ज़्यादा १५ घंटों में दिखने लगता है। लेकिन सबसे पहले असर कुछ मिनटों में दिखाई देना शुरु हो सकता है। पर आमतौर पर यह असर आधे घंटे के बाद ही दिखना शुरु होता है।

खून के जीवविष के लक्षण

जहरीला सांप कांटने पर दॉंतों के दो निशान होते है, ज्यादा निशान हो तो समझे की सांप जहरीला नहीं। जहरीले सांप के डंक से या तो पलके झपकने लगती है, या मसुडों से खून रिसने लगता है।

रक्त के कारण डंकसे और मसूड़ों और फिर अन्य जगहों से खून बहना शुरु हो जाता है। मसूड़ों से खून आना सबसे आम लक्षण है जो कि करीब ९५ प्रतिशत मामलों में दिखाई देता है। आमतौरपर लक्षण एक घंटे के अंदर अंदर दिखाई देने लगते हैं। ज़्यादातर असर २४ घंटों में दिखने लगते हैं। मैंने एक अपवाद भी देखा है जिसमें काटने के करीब तीन दिन बाद पेशाब में खून आना शुरु हुआ। शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि डंकमें ज़हर की मात्रा कम गई थी। दोनों तरह के ज़हरीले सांप द्वारा काटने पर काटे जाने वाली जगह के ऊतकों में ऊतकक्षय होने और फिर उससे होने वाले ज़ख्मों का सड़ने लगना आम है। पर ऐसा वाइपर के काटने पर ज़्यादा होता है।

हृदयविष के लक्षण

हृदयविष से तुरंत दिल पर असर होता है। इससे हार्ट फेल होकर कुछ ही मिनटों में मृत्यु हो जाती है।