July 5, 2022

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अनुमान लगा सकते हैं अमृतसर के रोज के लंगर का खर्चा कितना आता होगा ?

-एक अनुमान के मुताबिक, स्वर्ण मंदिर में रोजाना करीब 1 लाख लोग लंगर खाते हैं।

त्योहारों पर और वीकेंड पर यह संख्या डबल हो जाती है।
-यहां रोजाना 7000 किलो गेहूं का आटा, 1300 किलो दाल, 1200 किलो चावल और 500 किलो मक्खन इस्तेमाल होता है।
-यहां औसतन 450 वॉलंटियर्स सब्जियां छीलने, काटने, सर्वर करने और बर्तन धोने का काम करते हैं।
-यहां बनने वाला खाना वेजिटेरियन होता है। मंदिर आने वाले भक्त और दुनियाभर के लोग यहां लंगर के लिए पैसे दान करते हैं।
यहां बर्तन तीन बार अलग-अलग ग्रुप के वॉलंटियर्स धोते हैं ताकि ये एकदम साफ हो सकें।
-रोटियां इलेक्ट्रिक मशीन से बनाई जाती हैं, इससे हर घंटे 3000 से 4000 रोटियां हर घंटे बन जाती हैं। वहीं महिलाएं भी हर घंटे करीब 2000 रोटियां बना लेती हैं।
-इसके अलावा यहां खाना पकाने के लिए 100 सिलेंडर और 500 किलो लकड़ी लग जाती है।
-यह लंगर सबके लिए होता है। कोई भी व्यक्ति यहां आकर फ्री खाना खा सकता है। यह खाना वॉलंटियर्स सर्व करते हैं।