राजीव गाँधी पर लगे गंभीर आरोप और आलोचनाएं कौन कौन सी हैं ?

राजीव गांधी पर सबसे बड़ा आरोप 64 करोड़ के बोफोर्स घोटाले में संलिप्त होने का लगा जिसके कारण उनको प्रधानमन्त्री पद से भी हाथ धोना पड़ा।

उन पर दूसरा बड़ा आरोप शाहबानो प्रकरण में लगा जब उन्होने संसद में कांग्रेस के प्रचण्ड बहुमत का दुरुपयोग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के उल्टा विधेयक पारित करवा लिया।

१९८४ में हुए सिख विरोधी दंगों के सन्दर्भ में राजीव द्वारा दिए गए वक्तव्य की भी बड़ी आलोचना हुई। राजीव ने कहा था कि “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती तो हिलती ही है।”

१९९१ में Schweizer Illustrierte नामक पत्रिका ने राजीव पर स्विस बैंकों में ढाई बिलियन स्विस फ्रैंक काले धन रखने का आरोप लगाया।परंतु यह आरोप कभी सत्य साबित नहीं हुए.

१९९२ में टाइम्स ऑफ इण्डिया ने एक रपट प्रकाशित की जिसमें कहा गया था कि सोवियत संघ की गुप्तचर संस्था के जी बी ने राजीव को धन मुहैया कराया था।

उन पर भोपाल गैस काण्ड के आरोपी वारेन एंडरसन को रिश्वत लेकर देश से भगाने का आरोप भी लगाया गया है।

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